।। पं भीमसेन जोशी जी को श्रद्धांजलि ।।। सुर साधे सब जियत जब , अब सुर साधै ताहि । सुर संगति के लाभ से , बसहि स्वरग मै जाहि ।। सुर राखे सब कण्ठ मैं गाय सकल संसार । मिलै सुरन से सुरन कौ सूर करो साकार ।। भीमसेन तन त्याग कै सुर समान हुइ जात । सुरग मध्य गंधर्व सम सप्त सुरन मय गात ।। भीमसेन गाय यश पाये । सुर संवंध सवहि समुझाये ।। मिलै सुर मेरा तुम्हारा । गाय सकल आज संसारा ।। सेवा करि सुरन सब गाये । गायन की भाषा रम्भाये ।। सुर साधि साधु सम माना । ज्ञानी सुर समान नहि जाना ।। भीमसेन गावै जस जोशी । सुर संयोग योग नहि दोषी ।। स्वास साधि सुर वस मै कीन्हें । गाय प्रसाद यश पूरण लीन्हें।। भीमसेन को करहि प्रणामा । गाय सुरन हित जोशी नामा ।।
